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Saturday, 1 September 2018

how to start Fly ash bricks business, what is cost to start Fly ash bricks plant, what is earnini in Fly Ash Bricks business, how much i may earn from Fly ash bricks business Fly ash bricks plant ki jaankari in hindi, | जानें राख की ईंट के बिजनेस का A टू Z प्रॉसेस, 1 लाख रु तक हो सकती है कमाई

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10 लाख रुपए में शुरू होता यह बिजनेस, बस थोड़ी सी जमीन और कोयले की मुफ्त राख की जरूरत


रेग्‍युलर इनकम के लिए किसी अच्‍छे बिजनेस की तलाश में हैं तो आपके लिए इस समय फ्लाई एश ब्रिक (ईंट) का बिजनेस अच्‍छा ऑप्‍शन हो सकता है। फ्लाई एश ब्रिक को आम तौर पर सीमेंट की ईंट भी कहा जाता है। इस बिजनेस से न सिर्फ आपको शुरुआत में अच्‍छी इनकम होगी बल्कि आप इस बिजनेस से जुड़े अग्रणी लोगों में भी शुमार हो सकते हैं। इसका कारण मौजूदा समय में फ्लाई एश ब्रिक्‍स का चलन का बढ़ना। बिजनेस की शुरुआत 10 लाख रुपए से 30 लाख रुपए (क्षमता के अनुसार) तक में हो सकती है। जहां तक इनकम की बात है तो इस बिजनेस से शुरुआत में 1 लाख रुपए महीना से करोड़ों रुपए प्रति वर्ष तक कमाई हो सकती है। आइए आपको बताते हैं फ्लाई एश ब्रिक्‍स बनाने के बिजनेस मॉडल को....


8 लाख रुपए से शुरू होती है मशीन की कीमत 
फ्लाई एश ब्रिक बनाने वाली मशीन की कीमत 8 लाख रुपए से शुरू होकर 22 लाख रुपए तक है। नोएडा सेक्‍टर-1 स्थित जोएका मैन्‍युफैक्‍चरिंग के मालिक अली खान ने moneybhaskar.com को बताया कि ये सभी मशीनें ईंट बनाने की क्षमता के अनुसार है। 8 लाख रुपए कीमत वाली मशीन की क्षमता 1000 से 1500 ईंट प्रति घंटा तैयार कर सकती है जबकि, 22 लाख रुपए वाली मशीन एक घंटे में 7000 से 8000 ईंट बना सकती है। बिजनेस शुरू करने के लिए आपके पास जमीन का होना बहुत जरूरी है। ताकि, मशीन को लगाने के बाद आप ईंटों का भंडारण भी कर सकें। 

मिट्टी से बनी ईंटों से हैं किफायती
दरअसल, मिट्टी से बनने वाली ईंटों से फ्लाई एश की ईंटें काफी किफायती मानी जाती हैं। देहरादून के बिल्‍डर मोहन राणा ने moneybhaskar.com को बताया कि फ्लाई एश की ईंट से मकान बनाने में सीमेंट का खर्च 20 से 30 फीसदी तक कम हो जाता है। इसके अलावा फिनिशिंग दीवार के दोनों तरफ आती है। इससे प्‍लास्‍टर में भी सीमेंट की बचत होती है। वहीं सूखी राख होने के कारण मकान में नमी नहीं आती है। 
 - कितने इन्‍वेस्‍टमेंट की है जरूरत...
कोयले की राख की होती है सबसे ज्‍यादा जरूरत
फ्लाई एश ईंट बनाने में सबसे ज्‍यादा जरूरत एश यानी राख की होती है। यह राख कोयले से बिजली पैदा करने वाले प्‍लांट से मिलती है। मेरठ के फ्लाई एश ईंट के कारोबारी जयदीप राजपूत ने बताया कि एनटीपीसी के प्‍लांट पर यह राख प्रदूषण को देखते हुए इस राख को फ्री में देते हैं। केवल इसे अपने प्‍लांट तक लाने के लिए जो खर्च होता है बस वही इसकी कीमत होती है। ईंट बनाने के लिए 55 फीसदी फ्लाई एश, 35 फीसदी रेत और  10 फीसदी सीमेंट की जरूरत होती है। इसके अलावा 65 फीसदी फ्लाई एश, 20 फीसदी रेत, 10 फीसदी चूना और 5 फीसदी जिप्‍सम के मिक्‍चर से भी ईंट बनाई जाती है।

 - 2 से 2.5 रुपए आता है खर्च
2 से 2.5 रुपए आता है खर्च
कारोबारी जयदीप राजपूत ने बताया कि फ्लाई एश की एक ईंट बनाने में खर्च लगभग 2 से 2.5 रुपए आता है। यह खर्च अलग-अलग जगहों के हिसाब से अलग हो जाता है। जयदीप के यहां हरियाणा के अंबाला से ही राख आती है। वहीं के डीलर इस एश (राख) को पहुंचाते हैं। जयदीप ने बताया कि वे अपनी मशीन से सीमेंट ब्‍लॉक, इंटरलॉकिंग टाइल्‍स आदि भी बनाते हैं। जिसकी जरूरत होती है वही माल तैयार कर लिया जाता है।
 
-  कितनी होती है इनकम....
1 लाख रुपए से शुरू होती है इनकम
फ्लाई एश की ईंट की भी बाजार में सामान्‍य ईंटों के बराबर ही कीमत है। यह लगभग 4 रुपए से 5 रुपए प्रति ईंट तक बिकती है। यदि प्‍लांट दूर है तो कीमत बढ़ जाती है। कारोबारी जयदीप राजपूत बताते हैं कि जब ईंट को पूरी तरह से सूखकर तैयार होने में 28 दिन का समय लगता है। इसके बाद इसकी बिक्री शुरू होती है। एक महीने में अगर आप 50 हजार ईंट भी बेचते हैं तो आप आसानी से 1 लाख रुपए की इनकम कर सकते हैं। जबकि, 50 हजार ईंट आप केवल 5 से 6 घंटे में तैयार कर लेते हैं। जयदीप के अनुसार इस समय इन ईंटों की मांग बहुत है तो आसानी से एक महीने में 1.5 से 2.5 लाख ईंट बिक जाती हैं।

what is the cost of home made paper bag | होम मेड पेपर बैग बनाना हुआ सस्‍ता, सरकार ने दी प्‍लास्टिक मिक्‍स करने की सलाह

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20% प्‍लास्टिक मिक्‍स करके 34 % कम हो जाएगी पेपर बैग की कीमत

प्‍लास्टिक पर बैन लगने के बाद जहां इससे जुड़ी इंडस्‍ट्रीज की चिंता बढ़ गई है, वहीं पेपर बैग बनाने वाले कारोबारियों की आमदनी बढ़ने के आसार है। ऐसे समय में, सरकार ने कहा है कि यदि पेपर बैग बनाते वक्‍त प्‍लास्टिक कचरे का भी इस्‍तेमाल किया जाए तो पेपर बैग की कीमत कम हो जाएगी, वहीं पेपर बैग मजबूत भी बनेगा। ऐसे ही बैग कुमारप्‍पा हैंडमेड पेपर इंस्‍टीट्यूट ने तैयार किए हैं, जिन्‍हें खादी एवं विलेज इंडस्‍ट्री कमीशन के चेयरमैन विनय कुमार सक्‍सेना ने लॉन्‍च किया।

20 फीसदी प्‍लास्टिक मिक्‍स
सक्‍सेना ने कहा कि 2 अगस्‍त को वह कुमारप्‍पा हैंडमेड पेपर इंस्‍टीट्यूट (KNHPI), जयपुर गए थे। जयपुर में पॉलिथीन वेस्‍ट को देख कर उन्‍हें आइडिया आया कि क्‍यों न इस वेस्‍ट का इस्‍तेमाल हैंड मेड पेपर में किया जाए। उन्‍होंने इस बारे में KNHPI के वैज्ञानिकों से बात की और कहा कि गारबेज से प्‍लास्टिक वेस्‍ट को इकट्ठा करवाया जाए और लगभग 20 फीसदी वेस्‍ट को क्‍लीनिंग व प्रोसेसिंग करने के बाद पेपर पल्‍प में मिक्‍स करके पेपर तैयार करने की संभावना तलाशी जाए। उन्‍होंने कहा कि यह प्रयोग सफल रहा और अब पेपर इंडस्‍ट्री को 20 फीसदी प्‍ल‍ास्टिक वेस्‍ट मिक्‍स करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

कितना होगा फायदा
अब तक वाइट कॉटन रेग्‍स से होम मेड पेपर बनाया जाता है, जिसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम है। यदि इसमें पॉलिथीन वेस्‍ट‍ मिलाया जाता है तो इसकी कीमत 66 रुपए प्रति किग्रा तक पहुंच जाएगी, यानी कि 34 फीसदी कम। इस होम मेड पेपर से तैयार कैरी बैग की कीमत 15.50 प्रति बैग आती है और एक लाख कैरी बैग बनाने के लिए लगभग 10 मीट्रिक टन पल्‍प की जरूरत पड़ती है, लेकिन यदि इसमें पॉलिथीन वेस्‍ट मिलाया जाता है तो 12.10 प्रति बैग की लागत आ रही है और एक लाख कैरी बैग बनाने के लिए लगभग 2 मीट्रिक टन पॉलिथीन वेस्‍ट की खपत हो जाएगी। इससे जहां प्‍लास्टिक वेस्‍ट की समस्‍या काफी कम हो जाएगी, वहीं पेपर बैग की कीमत भी लागत कम हो जाएगी।

world biggest investor warren buffett investing in Paytm | कभी ठीक से अंग्रेजी नहीं बोल पाता था यह इंडियन, अब वारेन बफे ने लगाया दांव

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भारत में वारेन बफे ने किया पहला निवेश

दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर कहे जाने वाली वारेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे ने Paytm की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस में 2500 करोड़ रुपए (35.60 करोड़ डॉलर) में 4 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। वारेन बफे का किसी भी भारतीय स्टार्टअप कंपनी में यह पहला इन्वेस्टमेंट है। यह विजय शेखर शर्मा की कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि वारेन बफे सीधे तौर पर पहली बार किसी भारतीय कंपनी में हिस्सा खरीद रहे हैं। वह देश के ऐसे अरबपति हैं जिन्हें परिवार से विरासत में बड़ा कारोबार नहीं मिला लेकिन अपनी मेहनत और आइडिया के दम पर अरबों का कारोबार खड़ा कर दिया।



छोटे शहर में बीता बचपन
वन 97 कम्युनिकेशंस के एमडी विजय शेखर शर्मा का अलीगढ़ के छोटे से शहर में बचपन बीता है। वह अलीगढ़ के एक मिडिल क्लास परिवार से हैं। पेटीएम के एमडी विजय शेखर शर्मा की मां हाउसवाइफ और पिता स्कूल टीचर थे। शर्मा ने अपनी 12वीं क्लास 14 साल की उम्र में ही पास कर ली थी। उन्हें इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए कई साल इंतजार करना पड़ा, क्योंकि उनकी उम्र कम थी।


नहीं बोल पाते थे अंग्रेजी
स्कूल की पढ़ाई करने क बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। हिंदी मीडियम से पढ़ाई होने के कारण वह इंग्लिश में कमजोर थे, क्योंकि उन्होंने ज्यादातर पढ़ाई हिंदी मीडियम में की थी। उनके लिए अंग्रेजी में एंट्रेस एग्जाम देना थोड़ा मुश्किल था लेकिन इसका भी हल उन्होंने निकाला। अपनी इस कमी पर काबू पाने के लिए वह एक ही किताब के हिंदी और इंग्लिश वर्जन लाते और साथ-साथ पढ़ते।
 - कैसे शुरू की पहली कंपनी
कॉलेज के दौरान बनाई पहली कंपनी 
उन्होंने अपनी पहली कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही बना ली थी। उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर कंपनी एक्सएस कॉर्प्स बनाई थी। उनकी फर्म वेब के लिए कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम बनाती थी, जिसे वह अपने हॉस्टल के कमरे से चलाते थे। तब हॉस्टल रूम उनका ऑफिस और दुकानदार का फोन लैंडलाइन नंबर होता था। उन्होंने पेटीएम शुरू करने से पहले एक्सएस और वन97 जैसी कंपनियां बनाई और अपनी सारी जमा पूंजी इसमें लगा दी। उनके पार्टनर उन्हें छोड़कर चले गए।


फिर बनाया पेटीएम..
मार्केट में स्मार्टफोन आए तो उन्होंने शॉपिंग वेबसाइट और रीचार्ज प्लेटफॉर्म के तौर पर पेटीएम शुरू की। अब पेटीएम मोबाइल वॉलेट के साथ बिलिंग पेमेंट प्लेटफॉर्म भी है। नोटबंदी का सबसे ज्यादा फायदा पेटीएम को मिला और इसने विजय शेखर को अरबपतियों की गितनी में शामिल कर दिया। अब दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर वारेन बफे उनकी कंपनी में इन्वेस्ट कर रहे हैं।

 - विरासत में नहीं मिली दौलत..
नहीं मिली थी विरासत में दौलत

विजय शेखर शर्मा देश के ऐसे अरबपति हैं जिन्हें काफी मेहनत के बाद यह मुकाम मिला है। उन्होंने देश के टॉप 100 अमीर भारतीय की लिस्ट में जगह बनाई है।

विजय शेखर शर्मा, एमडी पेटीएम
इंडिया के अमीर लोगों में रैंकिंग – 99
नेटवर्थ – 1.47 अरब डॉलर

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