आईआईटी मुंबई से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक करने वाले गीता नगर निवासी अमितेश मिश्रा ने आईआईटी कानपुर का इनक्यूबेशन सेंटर ज्वाइन किया। सिडबी की मदद और डॉ. अनुपम सक्सेना की देखरेख बिजनेस प्लान बनाया।
वर्ष 2007 से हिंदी की सोशल साइट ‘शब्द नगरी’ (http://www.shabdanagari.in/) पर रिसर्च शुरू किया। यह रिसर्च अब पूरा हो गया है।
‘शब्द नगरी’ पूरी तरह से हिंदी में बनी है। इसका इस्तेमाल हिंदी भाषी आसानी से कर सकेंगे। हिंदी के ऑन स्क्रीन की-बोर्ड बनाए गए हैं। जिस तरह गूगल पर अंग्रेजी लिखने पर शब्द या नाम का हिंदी वर्जन आ जाता है, उसी तरह का प्रावधान शब्द नगरी में है। इसका इस्तेमाल किसी भी सोशल साइट की तरह किया जा सकता है। शब्द नगरी की मदद से हिंदी के ब्लाग, वेबसाइट, पेज और एकाउंट बनाए जा सकते हैं।
अमितेश ने कहा कि यह सोशल साइट मेड इन इंडिया का एहसास कराएगी। इसकी तकनीकी, क्वालिटी, परफारमेंस सब कुछ राष्ट्रभाषा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बीटेक के बाद नौकरी नहीं की। इसके पीछे मंशा बिजनेस करने की थी। कोशिश थी कि जॉब डिमांडर न बनूं। जॉब क्रिएटर बनकर समाज और देश के लिए कुछ करूं। अब इस राह पर आगे बढ़ गया हूं। 24 जनवरी को आईआईटी के आउटरिच आडिटोरियम में शब्द नगरी की लांचिंग होगी। लांचिंग के लिए पद्मश्री गिरिराज किशोर को बुलाया गया है। वह हिंदी के जाने-माने विद्वान हैं।
आईआईटी कानपुर इनक्यूबेशन सेंटर इंचार्ज प्रो. बीबी फणी ने बताया कि यह रिसर्च राष्ट्रभाषा का सम्मान बढ़ाएगा। यह पहला मौका है, जब� इनक्यूबेशन सेंटर की मदद से हिंदी पर इतना अच्छा रिसर्च किया गया है। जो सोशल साइट बनाई गई है, वह आकर्षक और इस्तेमाल में सरल है। हिंदीभाषी इससे आसानी से जुड़ सकेंगे।