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Monday, 19 August 2013

windows xp,विंडोज़ के कुछ विकल्प

आइये जानते है विंडोज़ XP के कुछ विकल्प - मजेदार दुनियाँ
आइये जानते है  विंडोज़ XP के कुछ विकल्प अप्रैल 2014 के बाद से माइक्रोसॉफ्ट अपने सफल ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ XP को अलविदा कह देगा। बेहतर होगा कि आप एक्सपी के विकल्पों के बारे में सोचें। 

ऑप्शन से पहले तय करें यूज़
ऐसे में आपके पास सिर्फ दो विकल्प हैं। या तो विंडोज़ एक्सपी पर काम करते रहें और अपनी सिक्यूरिटी किस्मत के भरोसे छोड़ दें या फिर किसी बेहतर ऑपरेटिंग सिस्टम को अपना लें। नए ऑपरेटिंग सिस्टम का चुनाव कई बातों पर निर्भर करेगा। सबसे अहम होगा आपका बजट और कामकाज का मौजूदा तौर-तरीका।



अगर आप विंडोज़ पर काम करने के आदी हो चुके हैं तो हो सकता है मैकिन्टोश (ऐपल का ऑपरेटिंग सिस्टम) या Linux (ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम) जैसे किसी दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने में परेशानी महसूस करें। ऐसे में विंडोज़ की ही सीरिज़ के किसी नए ऑपरेटिंग सिस्टम को अपनाना आपकी मजबूरी बन जाती है।

विंडोज़ में क्या हैं ऑप्शंस
विंडोज़ में आपके पास दो ठोस विकल्प हैं- विंडोज़ 7 और विंडोज़ 8। हालांकि विंडोज़ विस्टा का विकल्प भी मौजूद है लेकिन यह स्पीड और यूज़र इंटरफेस के मामले में मात खा जाता है। यही कारण है कि विस्टा अधिक लोकप्रिय नहीं हो सका।

समझें 7 और 8 का गणित
विंडोज़ 7 और विंडोज़ 8 में से किसी एक का चुनाव करना आसान काम नहीं है। दोनों की कुछ खासियतें और सीमाएं हैं। आखिरी फैसला लेने से पहले दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम्स की तुलना कर लेना जरूरी है।

कब तक मिलेगा सपोर्ट? :
आम तौर पर माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए दस साल तक सिक्यूरिटी अपडेट्स और सपोर्ट उपलब्ध होता है। विंडोज़ 7 की शुरुआत 2009 में हुई थी, यानी कम से कम 2019 तक माइक्रोसॉफ्ट इसका सपोर्ट जारी रखेगा। दूसरी तरफ विंडोज़ 8 इसके तीन साल बाद आया था, इसलिए उसे खरीदने के बाद आप 2022 तक सिक्युरिटी को लेकर निश्चिंत हो सकते हैं।

लोकप्रियता:
विंडोज़ 8 के मुकाबले विंडोज़ 7 ज्यादा लोकप्रिय है। कारण है इसका पिछले ऑपरेटिंग सिस्टम्स से मिलता-जुलता होना, काम करने में आसान और तेज़ होना। विंडोज़ का यह एडिशन काफी सिक्युअर भी है। दूसरी तरफ माइक्रोसॉफ्ट की तमाम कोशिशों के बावजूद विंडोज़ 8 लोगों को अपनी ओर नहीं खींच पा रहा है। यह पारंपरिक लैपटॉप-डेस्क टॉप ऑपरेटिंग सिस्टम्स से काफी अलग दिखता है और टैब्लेट्स जैसे मोबाइल डिवाइस के हिसाब से ज्यादा फिट नजर आता है। माइक्रोसॉफ्ट ने इसे लोकप्रिय बनाने के लिए बेहद सस्ते दामों पर अपग्रेड करने की सुविधा भी दी थी लेकिन उसका बहुत फर्क पड़ा हो, ऐसा नहीं लगता।

इस्तेमाल में आसानी :
विंडोज़ 7 को इस्तेमाल करने में कोई खास मुश्किल पेश नहीं आती क्योंकि इसका यूज़र इंटरफेस काफी हद तक विंडोज़ एक्सपी जैसा ही है। वही स्टार्ट बटन, वही डेस्क टॉप  वही स्टार्ट मेन्यू, वही टास्क बार और वही पावर बटन। दूसरी तरफ विंडोज़ 8 को पहली बार इस्तेमाल करने पर आपको माहौल पराया-पराया सा लगेगा। इसे स्टार्ट स्क्रीन कहा जाता है लेकिन यहां स्टार्ट बटन ग़ायब है, स्टार्ट मेन्यू भी और पावर बटन को बदलकर दूसरी जगह ले जाया गया है, जहां वह काम भी दूसरे ही तरीके से करता है।

डेस्क टॉप पर फाइलें रखने की आदत से मजबूर लोग विंडोज़ 8 पर काम करते हुए झुंझला जाते हैं। यहां भी डेस्क टॉप है तो सही लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए अलग से जहमत उठानी पड़ती है। सिस्टम खोलने के बाद सामने आने वाली स्क्रीन पिछले ऑपरेटिंग सिस्टम्स जैसी भी नहीं है।

सॉफ्टवेयर सपोर्ट:
यहां भी विंडोज़ 7 बाज़ी मार ले जाता है। विंडोज़ एक्सपी पर चलने वाले ज्यादातर सॉफ्टवेयर इसमें बड़े आराम से काम करते हैं । जबकि विंडोज़ 8 में कुछ पुराने सॉफ्टवेयर नहीं चल पाते। हालांकि उन्हें कम्पैटिबिलिटी मोड में ले जाकर चलाया जा सकता है लेकिन आम यूजर्स के लिए इस तरह की तकनीकी सेटिंग्स कर पाना मुश्किल काम है।

ऐप:
अगर आप ऐप्लीकेशन्स के दीवाने हैं तो विंडोज़ 8 आपको पसंद आएगा। इसमें टैब्लेट्स और स्मार्टफोन्स की ही तरह ऐप्लीकेशन्स के कॉन्सेप्ट को शुरू किया गया है। जरूरत के लिहाज से ऐप्लीकेशन्स को डाउनलोड करना बेहद आसान है। खासकर बच्चों को यह बहुत पसंद आता है जिन्हें नए-नए गेम्स और ऐप्लीकेशन्स पाने के लिए कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ती।

कामकाज का ढंग :
अगर आप मोबाइल डिवाइस टैब्लेट्स, लैपटॉप्स आदि का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं तो विंडोज़ 8 ज्यादा आसान और सुविधाजनक महसूस होगा। टच बेस सिस्टम्स को पसंद करने वालों को यह भाएगा। लुक्स को तरजीह देते हैं तो यही बेहतर होगा। इसे नए दौर के यूजर्स की आदतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है। लेकिन ऑफ़िस या घर पर इत्मिनान से बैठकर काम करने वालों को विंडोज़ 7 जैसा नो-नॉनसेंस, प्रफेशनल क्वॉलिटी ऑपरेटिंग सिस्टम ज्यादा पसंद आएगा।

सिक्यूरिटी:
विंडोज़ 8 के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने अपना एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर विंडोज़ डिफेन्डर नए सिरे से तैयार किया है। अब यह बाजार में मिलने वाले किसी भी एंटी वायरस की टक्कर का है इसलिए सिक्यूरिटी पर होने वाले अलग खर्च से बचाता है। विंडोज़ 8 के साथ आने वाला इंटरनेट एक्सप्लोरर 10 भी अपने पिछले एडिशंस से ज्यादा सिक्युअर है।

काम की तेजी:
विंडोज़ 7 एक तेज-तर्रार ऑपरेटिंग सिस्टम है लेकिन विंडोज़ 8 की तेजी विंडोज़ 7 को शर्माने पर मजबूर कर देती है। विंड़ोज़ 7 के कई स्पेशल विजुअल इफेक्ट्स नए ऑपरेटिंग सिस्टम (विंडोज़ 8) में शामिल नहीं किए गए हैं। इन इफेक्ट्स को चलाने में कंप्यूटर के प्रॉसेसर की जो एनर्जी खर्च होती थी, वह जरूरी सॉफ्टवेयर्स को चलाने में ज्यादा इस्तेमाल हो पाती है। नतीजा? कामकाज की तेजी। प्रॉसेसर पर बोझ कम है इसलिए अगर एक ही किस्म (कॉन्फिग्युरेशन) के दो लैपटॉप में से एक में विंडोज़ 7 और दूसरे
में विंडोज़ 8 चलाएँगे तो विंडोज़ 8 पर चलने वाले लैपटॉप में बैटरी ज्यादा चलेगी।

भविष्य किसका है :
विंडोज़ 7 का मतलब है पारंपरिक लेकिन दमदार ऑपरेटिंग सिस्टम। विंडोज़ 8 का मतलब है, नए जमाने और नए तौर-तरीकों के मुताबिक ठीकठाक ऑपरेटिंग सिस्टम। भविष्य विंडोज़ 8 की तरफ झुका हुआ लगता है। आने वाले वक्त मोबाइल डिवाइसेज का है और इसीलिए माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार पर अपनी पकड़ बरकरार रखने के लिए बीच का रास्ता निकाल रहा है। उसने फिलहाल एक नए हाइब्रिड इंटरफेस को विंडोज़ 8 के रूप में इंट्रोड्यूस किया है, लेकिन इसमें अभी बहुत काम बाकी है। ऐसे में विंडोज़ 7 के यूजर्स को आज नहीं तो कल नई किस्म के चेहरे-मोहरे वाले, टच-इनेबल्ड ऑपरेटिंग सिस्टम की तरफ जाना ही पड़ेगा। तब अभी से क्यों नहीं?

जेब पर कौन कितना भारी:
विंडोज़ 7 की तुलना में विंडोज़ 8 थोड़ा महँगा है।

विंडोज़ 8
सिंगल लैंग्वेज एडिशन 6000 रुपये
प्रोफेशनल एडिशन 10000 रुपये

विंडोज़ 7
होम बेसिक एडिशन 5000 रुपये में
होम प्रीमियम 6200 रुपये
प्रोफेशनल एडिशन 8200 रुपये
अल्टीमेट एडिशन 12000 रुपए

भविष्य में अगर आप विंडोज़ 7 से विंडोज़ 8 में अपग्रेड करेंगे तो कुछ रकम खर्च करनी पड़ेगी।


 manoj jaiswal

Friday, 14 September 2012

विंडो एक्सपी डालने की जानकारी


अकसर कई लोगो को कंप्यूटर फॉर्मेट करना करना नही आता आज की पोस्ट उन लोगो के लिए ही है जिन्हे कंप्यूटर फॉर्मेट करना नही आता पर कंप्यूटर फॉर्मेट करने से पहले आपके पास विंडो एक्सपी की बुटेबल सीडी और कंप्यूटर के डइवर की सीडी होना जरूरी है।
अपने कंप्यूटर की सीडी डइव मे एक्सपी की बुटेबल सीडी डाल दें। कंप्यूटर को रीस्टार्ट करें और जेसे ही वह स्टार्ट हो जो कीबोर्ड से एफ१० या डीलीट की दबाएं। इसके बाद बूट आर्डर मेन्यू मे जाकर सीडी रोम को सलेक्ट करें। जिससे कंप्यूटर खुलने के बाद सीधे आपके सीडी रोम को ही रीड करें

ये सब करने के बाद जैसे ही आपका कंप्यूटर स्टार्ट होगा और सीडी रोम को रीड करेगा तो एक नीले रंग की स्क्रीन आपके सामने आ जाएगी। स्क्रीन के सबसे नीचे वाले पार्ट मे कई फाइल्स के नाम एक के बाद एक आते रहेंगे।
कुछ देर बाद आपके सामने वेलकम टू सेटअप स्क्रीन आएगी इसमे आपको तीन ऑप्शन नजर आएंगे। पहले ऑप्शन मे विंडोज को ओपन करने के लिए एंटर दबाएं, दूसरे ऑप्शन मे रिपेअर करने लिए आर दबाएं और तीसरे ऑप्शन मे बाहर आने के लिए एफ३ दबाएं लिखा होगा।
यहां एंटर दबाएं जिसके बाद विंडोज एक्सपी की स्क्रीन आएगी। इसके बाद एफ ८ दबाएं।
अब हार्डडिस्क का पार्टिशन दिखाई देगा आप जिस भीपार्टिशन पर विंडोज एक्सपी को इंस्टॉल करना चाहते है उसे सिलेक्ट करके एंटर दबाएं। अगली स्क्रीन पर आपको ४ पोजिशन मिलेंगी पहले से सिलेक्ट होगा। आप इसी पर एंटर दबा दें।
एक बार जब आप एंटर दबा देंगे तो वह डइव को फॉमेट कर देगा और सेटअप फाइल्स हार्ड डिस्क मे कॉपी हेना शुरू हो जायेंगी।
थेडी देर मे कंप्यूटर के रीस्टार्ट होने के बाद विंडोज एक्सपी ग्राफिकल इंटरफेस आएगी। फिर कुछ देर बाद आपको लेंग्वेज का ऑप्शन दिखेगा यहां आप नेक्स्ट पर क्लिक हर दें। इसके बाद पर्सनेलाइज्ड यूअर सॉफटवेयर स्क्रीन आएगी। यहां आप अपना नाम लिखे। ऑगेनाइजेशन का नाम खाली छोड़ दें। अब फिर से नेक्स्ट पर क्लिक करें जिसके बाद यूअर प्रोडक्ट का ऑप्शन आएगा। यहां सीडी के साथ मिली सीडी की को डाले नेक्स्ट दबाने पर कंप्यूटर नेम और एडमिनिस्ट्‌ेटर स्क्रीन आएगी। अब कंप्यूटर नाम डालने के बाद नेक्स्ट दबाने पर आपके सामने डेट और टाइम कीसेटिंग का डायलॉग स्क्रीन आएगी। यहां अपने कंप्यूटर की डेट और टाइम सेट कर ले
अब नेक्स्ट दबाने पर विंडोज एक्सपी अपके नेटवर्क सॉफटवेयर को इंस्टॉल करने लगेगा। इसके बाद नेटवर्क सेटिंग स्क्रीन आपके सामने आ जाएगी। यहां आप डिफॉल्ट सेटिंग टिपीकल सेटिंग्स को ही सिलेक्ट रहने दें और नेक्स्ट ऑप्शन पर क्लिक करें। इसके बाद वर्कग्रुप कंप्यूटर डोमेन आएगा। यहां भी आप बिना कुछ चेंज किए नेक्स्ट दबाएं। इसके बाद विंडोज कई बची हुई फाइल्स को कॉपी करेगा।
अब कुछ देर बाद आपका कंप्यूटर रीस्टार्ट हो जाएगा जिसके बाद डिस्प्ले सेटिंग्स बॉक्स आएगा। यहां आप ओके दबाएं। हेल्प प्रोटेक्ट यूअर पीसी स्क्रीन मे हेल्प प्रोटेक्ट माई पीसी बाई टर्निग ऑप्शन को सिलेक्ट करें। नेक्स्ट बटन दबाएं इसके बाद चेकिंग द इंटरनेट कनेक्टिविटी स्क्रीन आएगी। यहां आप स्कीप को सलेक्ट करें। अब रेडी टू रजिस्टर विद माइक्रोसॉफ्ट स्क्रीन आ जाएगी। यहां आप नो नॉट एट दिस टाइम ऑप्शन को सिलेक्ट करें।
नेक्स्ट दबाने पर आपके सामने हू विल यूज दिस कंप्यूटर स्क्रीन आ जाएगी। यहां आप एक से लेकर पांच यूजर्स तक के नाम डाल सकते हैं। इसके बाद नेक्स्ट और अगली स्क्रीन पर फिनिश दबाएं।
आपके सामने विंडोज का डेस्कटॉप आ जाएगा। और आपकीविंडोज डल जाएगी। विंडोज डालने के बाद अपने कंप्यूटर की ड्राईवर  सीडी लगाए और अपनी जरूरत के हिसाब से अपने  सॉफ्टवेर  डाल ले
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